श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.145.4 
भीमसेन उवाच
हैडिम्बेय परिश्रान्ता तव मातापराजित।
त्वं च कामगमस्तात बलवान् वह तां खग॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - हे अपराजित एवं आकाशगामी हिडिम्बपुत्र! तुम्हारी माता द्रौपदी बहुत थकी हुई है। तुम शक्तिशाली हो और इच्छानुसार कहीं भी जाने में समर्थ हो; अतः उसे (आकाश मार्ग से) ले जाओ॥ 4॥
 
Bhimasena said - O undefeated and sky-traveling Hidimba son! Your mother Draupadi is very tired. You are powerful and capable of going anywhere as per your wish; therefore, take her (through the sky).॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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