vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन
»
श्लोक 26
श्लोक
3.145.26
ततस्तमाश्रमं रम्यं नरनारायणाश्रितम्।
ददृशु: पाण्डवा राजन् सहिता द्विजपुङ्गवै:॥ २६॥
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् पाण्डवों ने ब्राह्मणों सहित भगवान नारायण के उस रमणीय स्थान का दर्शन किया॥26॥
Rajan! Thereafter, the Pandavas along with the Brahmins together visited that delightful place of Lord Narayan. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×