श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.145.25 
तामुपेत्य महात्मान: सह तैर्ब्राह्मणर्षभै:।
अवतेरुस्तत: सर्वे राक्षसस्कन्धत: शनै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों सहित समस्त महाबली पाण्डव धीरे-धीरे राक्षसों के कंधों से नीचे उतर पड़े।
 
On reaching there, all the great Pandavas, along with those excellent Brahmins, slowly descended from the shoulders of the demons. 25.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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