| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 3.145.15  | मयूरैश्चमरैश्चैव वानरै रुरुभिस्तथा।
वराहैर्गवयैश्चैव महिषैश्च समावृतान्॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | वहाँ मोर, चमारी गाय, बन्दर, हिरण, सूअर, गाय और भैंस जैसे जानवर घूम रहे थे। | | | | Animals like peacock, Chamari cow, monkey, deer, pigs, cows* and buffaloes were roaming around there. 15. | | ✨ ai-generated | | |
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