Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.145.13-14: उस यात्रा में उन्होंने म्लेच्छों से भरे हुए और नाना प्रकार के रत्नों से संपन्न अनेक देश देखे। वहाँ उन्होंने नाना प्रकार की धातुओं से आच्छादित अनेक पर्वत देखे। उन पर्वत शिखरों पर अनेक विद्याधर, वानर, किन्नर, किंपुरुष और गंधर्व रहते थे।॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 3.145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस यात्रा में उन्होंने म्लेच्छों से भरे हुए और नाना प्रकार के रत्नों से संपन्न अनेक देश देखे। वहाँ उन्होंने नाना प्रकार की धातुओं से आच्छादित अनेक पर्वत देखे। उन पर्वत शिखरों पर अनेक विद्याधर, वानर, किन्नर, किंपुरुष और गंधर्व रहते थे।॥13-14॥
In that journey he saw many countries infested with mlechha (clan) people and which were rich in various kinds of gems. There he saw many hills covered with various kinds of metals. On those mountain peaks lived many Vidyadhars, Vanaras, Kinnars, Kimpurushas and Gandharvas.॥13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥