श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.145.10 
ब्राह्मणांश्चापि तान् सर्वान् समुपादाय राक्षसा:।
नियोगाद् राक्षसेन्द्रस्य जग्मुर्भीमपराक्रमा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
दैत्यराज घटोत्कच की आज्ञा से उन भयंकर एवं शक्तिशाली राक्षसों ने अन्य सभी ब्राह्मणों को अपने कंधों पर उठा लिया और वे साथ-साथ चलने लगे।
 
By the order of Demon King Ghatotkacha, all the other Brahmins were carried on their shoulders by those fearsome and powerful demons and they began to walk together.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)