Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.144.9: धर्मात्मा कुन्तीपुत्र ने देखा कि द्रौपदी के मुख की कांति लुप्त हो गई है और शरीर क्षीण हो गया है, तब उसने उसे गोद में उठा लिया और शोक से विलाप करने लगा। | mahabharat अध्याय 3.144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मात्मा कुन्तीपुत्र ने देखा कि द्रौपदी के मुख की कांति लुप्त हो गई है और शरीर क्षीण हो गया है, तब उसने उसे गोद में उठा लिया और शोक से विलाप करने लगा।
The virtuous Kunti's son saw that Draupadi's face had lost its glow and her body had become emaciated. Then he took her in his arms and began to mourn in grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥