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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.144.8 
वैशम्पायन उवाच
राजा तु वचनात् तस्य भृशं दु:खसमन्वित:।
भीमश्च सहदेवश्च सहसा समुपाद्रवन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! नकुल के ये वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी हुए और भीम तथा सहदेव के साथ सहसा वहाँ दौड़े।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Nakula, King Yudhishthira became very sad and suddenly ran there along with Bhima and Sahadeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)