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वैशम्पायन उवाच
राजा तु वचनात् तस्य भृशं दु:खसमन्वित:।
भीमश्च सहदेवश्च सहसा समुपाद्रवन्॥ ८॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! नकुल के ये वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी हुए और भीम तथा सहदेव के साथ सहसा वहाँ दौड़े।
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Nakula, King Yudhishthira became very sad and suddenly ran there along with Bhima and Sahadeva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥