श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.144.22 
बहव: पर्वता भीम विषमा हिमदुर्गमा:।
तेषु कृष्णा महाबाहो कथं नु विचरिष्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु भीम! यहाँ बहुत से ऊँचे-नीचे पर्वत हैं, जिन पर बर्फ के कारण चलना बहुत कठिन है। द्रौपदी उन पर कैसे जा सकेगी?॥ 22॥
 
‘Mahabahu Bhima! There are many high and low mountains here, walking on which is very difficult due to snow. How will Draupadi be able to go on them?’॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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