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mahabharat 3.144.17: जब महर्षि शान्ति के लिए मन्त्र पढ़ रहे थे, तब पाण्डव अपने शीतल हाथों से द्रौपदी के शरीर को बार-बार सहला रहे थे।17.   |   mahabharat अध्याय 3.144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.144.17 
पठॺमानेषु मन्त्रेषु शान्त्यर्थं परमर्षिभि:।
स्पृश्यमाना करै: शीतै: पाण्डवैश्च मुहुर्मुहु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब महर्षि शान्ति के लिए मन्त्र पढ़ रहे थे, तब पाण्डव अपने शीतल हाथों से द्रौपदी के शरीर को बार-बार सहला रहे थे।17.
 
While the great sages were reciting mantras for peace, the Pandavas repeatedly caressed Draupadi's body with their cool hands. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)