Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.144.15: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब धर्मराज युधिष्ठिर इस प्रकार विलाप कर रहे थे, उसी समय धौम्य आदि सभी श्रेष्ठ ब्राह्मण भी वहाँ आ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 3.144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.144.15 
वैशम्पायन उवाच
तथा लालप्यमाने तु धर्मराजे युधिष्ठिरे।
धौम्यप्रभृतय: सर्वे तत्राजग्मुर्द्विजोत्तमा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब धर्मराज युधिष्ठिर इस प्रकार विलाप कर रहे थे, उसी समय धौम्य आदि सभी श्रेष्ठ ब्राह्मण भी वहाँ आ पहुँचे।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! When Dharmaraja Yudhishthira was lamenting in this manner, at that very time all the great Brahmins including Dhoumya also reached there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)