Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.144.13-14: इसके पिता राजा द्रुपद ने हमें यह विशाल नेत्रों वाली द्रौपदी यह कहकर दी थी कि, ‘हे सुन्दरी! तुम पाण्डवों को पति रूप में पाकर सुखी रहोगी।’ किन्तु मेरे पाप कर्मों के कारण, वह सब कुछ न पाकर, आज यह श्रम, शोक और यात्रा के कष्टों से क्षीण होकर भूमि पर पड़ी हुई है। | mahabharat अध्याय 3.144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके पिता राजा द्रुपद ने हमें यह विशाल नेत्रों वाली द्रौपदी यह कहकर दी थी कि, ‘हे सुन्दरी! तुम पाण्डवों को पति रूप में पाकर सुखी रहोगी।’ किन्तु मेरे पाप कर्मों के कारण, वह सब कुछ न पाकर, आज यह श्रम, शोक और यात्रा के कष्टों से क्षीण होकर भूमि पर पड़ी हुई है।
Her father King Drupada had given us this big-eyed Draupadi saying, 'O fair-haired one! You will be happy to have the Pandavas as your husbands.' But due to the sinful deeds of me, having not received all that, she is today lying on the ground, emaciated due to labour, grief and the hardships of the journey.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥