श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 144: द्रौपदीकी मूर्छा, पाण्डवोंके उपचारसे उसका सचेत होना तथा भीमसेनके स्मरण करनेपर घटोत्कचका आगमन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.144.12 
किमिदं द्यूतकामेन मया कृतमबुद्धिना।
आदाय कृष्णां चरता वने मृगगणायुते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मुझ मूर्ख ने जुए की लालसा में क्या किया है? अहा! मुझे द्रौपदी के साथ इस भयंकर वन में, जो हजारों मृगों के झुंडों से भरा हुआ है, भटकना पड़ा॥12॥
 
What have I, the fool, done in the desire of gambling? Oh! I had to wander with Draupadi in this dreadful forest, which is filled with thousands of herds of deer.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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