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mahabharat 3.143.19: तत्पश्चात् तेज वायु के वेग से ओले सहित जल की धाराएँ अविराम वेग से गिरने लगीं और सम्पूर्ण दिशाओं को ढकने लगीं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.143.19 
ततोऽश्मसहिता धारा: संवृण्वन्त्य: समन्तत:।
प्रपेतुरनिशं तत्र शीघ्रवातसमीरिता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तेज वायु के वेग से ओले सहित जल की धाराएँ अविराम वेग से गिरने लगीं और सम्पूर्ण दिशाओं को ढकने लगीं॥19॥
 
Thereafter, driven by the strong wind, streams of water along with hail started falling at a non-stop speed, covering all directions. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)