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mahabharat 3.143.17-18: थोड़ी देर बाद जब वायु का वेग कम हो गया और धूल उड़ना बंद हो गई, तब भारी जलवर्षा होने लगी। तत्पश्चात मेघ गर्जना के समान गड़गड़ाने लगे और बादलों में सब ओर बिजली चमकने लगी॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 3.143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  3.143.17-18 
मन्दीभूते तु पवने तस्मिन् रजसि शाम्यति।
महद्भिर्जलधारौघैर्वर्षमभ्याजगाम ह॥ १७॥
भृशं चटचटाशब्दो वज्राणां क्षिप्यतामिव।
ततस्ताश्चञ्चलाभासश्चेरुरभ्रेषु विद्युत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद जब वायु का वेग कम हो गया और धूल उड़ना बंद हो गई, तब भारी जलवर्षा होने लगी। तत्पश्चात मेघ गर्जना के समान गड़गड़ाने लगे और बादलों में सब ओर बिजली चमकने लगी॥17-18॥
 
After a while, when the wind's speed decreased and the dust stopped flying, a heavy downpour of water started pouring down. Thereafter, the clouds started rumbling like thunder and flashes of lightning started moving in all directions in the clouds.॥ 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)