श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.143.15 
धर्मराजश्च धौम्यश्च निलिल्याते महावने।
अग्निहोत्राण्युपादाय सहदेवस्तु पर्वते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर और पुरोहित धौम्य अग्निहोत्र की सामग्री लेकर उस विशाल वन में छिप गए। सहदेव पर्वत पर (सुरक्षित स्थान पर) छिप गए।
 
Dharmaraja Yudhishthira and the priest Dhoumya hid themselves in that vast forest with the materials for the Agnihotra. Sahadeva hid himself on the mountain (in a safe place).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)