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mahabharat 3.143.13: तत्पश्चात् वे वायु के भय से जहाँ-तहाँ छिपने लगे और मार्ग के चारों ओर के वृक्षों, मिट्टी के ढेरों तथा ऊँचे-नीचे स्थानों को अपने हाथों से छूते रहे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.143.13 
ते पथानन्तरान् वृक्षान् वल्मीकान् विषमाणि च।
पाणिभि: परिमार्गन्तो भीता वायोर्निलिल्यिरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे वायु के भय से जहाँ-तहाँ छिपने लगे और मार्ग के चारों ओर के वृक्षों, मिट्टी के ढेरों तथा ऊँचे-नीचे स्थानों को अपने हाथों से छूते रहे॥13॥
 
After that, they started hiding everywhere, fearing the wind, while touching the trees, heaps of soil and high and low places around the road with their hands. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)