Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.143.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ, परम तेजस्वी योद्धा पाण्डव धनुष, बाण, तरकस, ढाल और तलवार लेकर, हाथों में गौचर्म के दस्ताने पहनकर, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को आगे करके द्रौपदी के साथ गन्धमादन पर्वत की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 143: गन्धमादनकी यात्राके समय पाण्डवोंका आँधी-पानीसे सामना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.143.1-2 
वैशम्पायन उवाच
ते शूरास्ततधन्वानस्तूणवन्त: समार्गणा:।
बद्धगोधाङ्‍‍गुलित्राणा: खड्गवन्तोऽमितौजस:॥ १॥
परिगृह्य द्विजश्रेष्ठाञ्‍ज्‍येष्ठा: सर्वधनुष्मताम्।
पाञ्चालीसहिता राजन् प्रययुर्गन्धमादनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ, परम तेजस्वी योद्धा पाण्डव धनुष, बाण, तरकस, ढाल और तलवार लेकर, हाथों में गौचर्म के दस्ताने पहनकर, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को आगे करके द्रौपदी के साथ गन्धमादन पर्वत की ओर चल पड़े।
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, that infinitely brilliant warrior Pandava, foremost among all the archers, took bow, arrows, quiver, shield and sword, wore gloves made of cow's skin in his hands and headed towards Mount Gandhamadan with Draupadi leading the best Brahmins. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)