श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.142.9 
एतस्या: सलिलं मूर्ध्नि वृषाङ्क: पर्यधारयत्।
गङ्गाद्वारे महाभाग येन लोकस्थितिर्भवेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाभाग! गंगाद्वार (हरिद्वार) - भगवान शंकर ने स्वयं इसके पवित्र जल को अपने मस्तक पर लगाया है, जिससे संसार की रक्षा हो सके॥9॥
 
Mahabhag! Gangadwar (Haridwar) - Lord Shankar has personally applied its holy water on his forehead, so that the world can be protected. 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas