श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.142.7 
अत्राह्निकं सुरश्रेष्ठो जपते समरुद्‍गण:।
साध्याश्चैवाश्विनौ चैव परिधावन्ति तं तदा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
देवश्रेष्ठ इन्द्र भी मरुतों के साथ यहाँ आकर प्रतिदिन नियमित रूप से जप करते हैं। उस समय साध्य और अश्विनीकुमार भी उनकी सेवा करते हैं।
 
The best of the gods Indra also comes here with the Maruts and chants regularly every day. At that time Sadhya and the Ashwinikumar also attend to him. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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