श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.142.62 
लोमश उवाच
ततो दृष्ट्वा महात्मानं श्रुत्वा चामन्त्र्य चामरा:।
पितामहं पुरस्कृत्य जग्मुर्देवा यथागतम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - युधिष्ठिर! तत्पश्चात देवताओं ने जाकर वराहरूपधारी भगवान विष्णु का दर्शन किया, उनकी महिमा सुनी और उनकी अनुमति लेकर ब्रह्माजी को आगे-आगे रखते हुए जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से लौट गये।
 
Lomasha says - Yudhishthira! Thereafter the Gods went and had darshan of the Supreme Lord Vishnu in the form of Varaha, heard his glories and after taking his permission they returned the same way they had come, with Brahmaji in front.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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