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mahabharat 3.142.58: देवताओं ने कहा - हे प्रभु! आप कृपा करके हमें उस स्थान का पता बताइए जहाँ भगवान वराह रूप में सुखपूर्वक पृथ्वी का उद्धार कर रहे हैं; हम सब वहीं चलेंगे॥58॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.142.58 
देवा ऊचु:
क्व तद् भूतं वसुमतीं समुद्धरति हृष्टवत्।
तं देशं भगवन् ब्रूहि तत्र यास्यामहे वयम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने कहा - हे प्रभु! आप कृपा करके हमें उस स्थान का पता बताइए जहाँ भगवान वराह रूप में सुखपूर्वक पृथ्वी का उद्धार कर रहे हैं; हम सब वहीं चलेंगे॥58॥
 
The gods said - O Lord! Please tell us the address of the place where the Lord in the form of Varaha is happily saving the earth; we will all go there. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)