श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.142.57 
तस्यामुद्धार्यमाणायां संक्षोभ: समजायत।
एवं भवन्तो जानन्तु छिद्यतां संशयश्च व:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी के उत्थान के समय ही यह महान् उथल-पुथल सर्वत्र प्रकट हुई है। इस प्रकार तुम्हें इस विश्वव्यापी उथल-पुथल का वास्तविक कारण जानना चाहिए और अपने भीतर के संशय दूर करने चाहिए ॥ 57॥
 
It is at the time of the upliftment of this earth that this great turmoil has been manifested everywhere. In this way you should know the real cause of this worldwide turmoil and your inner doubts should be dispelled. ॥ 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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