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श्लोक 3.142.53  |
सैषा वसुमती कृत्स्ना योजनानां शतं गता।
किमेतद् किं प्रभावेण येनेदं व्याकुलं जगत्।
आख्यातु नो भवान् शीघ्रं विसंज्ञा: स्मेह सर्वश:॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| 'यह सम्पूर्ण पृथ्वी सैकड़ों योजन नीचे चली गई है। अब किसके प्रभाव से यह कौन-सी विचित्र घटना घट रही है, जिससे सारा जगत व्याकुल हो गया है? कृपया शीघ्र ही इसका कारण बताइए। हम सब अचेत हो रहे हैं।'॥ 53॥ |
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| 'This entire earth had gone down hundreds of yojanas. Now, due to whose influence, what strange event is happening that has made the whole world restless? Please tell us the reason for this quickly. We all are becoming unconscious.'॥ 53॥ |
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