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श्लोक  3.142.52 
लोका: संक्षुभिता: सर्वे व्याकुलं च चराचरम्।
समुद्राणां च संक्षोभस्त्रिदशेश प्रकाशते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
देवेश्वर! सम्पूर्ण लोकों में खलबली मची हुई है। सभी जीव-जंतु व्याकुल हैं। समुद्रों में भी बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। 52।
 
‘Deveshwar! There is commotion in all the worlds. All living and non-living creatures are restless. A great disturbance is visible in the oceans. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)