श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.142.52 
लोका: संक्षुभिता: सर्वे व्याकुलं च चराचरम्।
समुद्राणां च संक्षोभस्त्रिदशेश प्रकाशते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
देवेश्वर! सम्पूर्ण लोकों में खलबली मची हुई है। सभी जीव-जंतु व्याकुल हैं। समुद्रों में भी बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। 52।
 
‘Deveshwar! There is commotion in all the worlds. All living and non-living creatures are restless. A great disturbance is visible in the oceans. 52.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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