श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.142.5 
एषा वैहायसैर्नित्यं बालखिल्यैर्महात्मभि:।
अर्चिता चोपयाता च गन्धर्वैश्च महात्मभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
देवऋषि बालखिल्य तथा महाबुद्धिमान गन्धर्व भी प्रतिदिन इसके तट पर आकर इसकी पूजा करते हैं।॥5॥
 
The celestial sage Balakhilya and the highly-minded Gandharvas also visit its banks daily and worship it. ॥5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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