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mahabharat 3.142.47: वीर युधिष्ठिर! अविनाशी भगवान विष्णु ने अपने एक चमकते हुए दाँत से पृथ्वी को धारण करके उसे सौ योजन ऊँचा उठा दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.142.47 
स गृहीत्वा वसुमतीं शृङ्गेणैकेन भास्वता।
योजनानां शतं वीर समुद्धरति सोऽक्षर:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वीर युधिष्ठिर! अविनाशी भगवान विष्णु ने अपने एक चमकते हुए दाँत से पृथ्वी को धारण करके उसे सौ योजन ऊँचा उठा दिया।
 
Brave Yudhishthira! The indestructible Lord Vishnu held the Earth with just one of his shining teeth and raised it a hundred yojanas high.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)