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mahabharat 3.142.44: भगवान विष्णु ने कहा - वसुधे ! तुम बोझ से पीड़ित हो; परंतु अब उससे डरो मत । मैं अब ऐसा उपाय करूँगा जिससे तुम्हारा बोझ हल्का हो जाएगा ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.142.44 
विष्णुरुवाच
न ते महि भयं कार्यं भारार्ते वसुधारिणि।
अहमेवं तथा कुर्मि यथा लघ्वी भविष्यसि॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु ने कहा - वसुधे ! तुम बोझ से पीड़ित हो; परंतु अब उससे डरो मत । मैं अब ऐसा उपाय करूँगा जिससे तुम्हारा बोझ हल्का हो जाएगा ॥ 44॥
 
Lord Vishnu said - Vasudhe! You are suffering from the burden; but do not fear it now. I will now take such measures by which you will become lighter. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)