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mahabharat 3.142.43: पृथ्वी के ये वचन सुनकर अविनाशी भगवान नारायण प्रसन्न हो गए और मधुर वाणी से मधुर शब्दों में बोले॥43॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.142.43 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा भगवानक्षर: प्रभु:।
प्रोवाच वचनं हृष्ट: श्रव्याक्षरसमीरितम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के ये वचन सुनकर अविनाशी भगवान नारायण प्रसन्न हो गए और मधुर वाणी से मधुर शब्दों में बोले॥43॥
 
Hearing these words of the earth, the immortal Lord Narayan became pleased and said in a sweet voice with sweet syllables. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)