Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.142.39: हे प्रिये! इस प्रकार जब प्राणियों की संख्या बहुत बढ़ गई और स्थिति अत्यन्त भयंकर हो गई, तब पृथ्वी उस अत्यन्त भारी भार से दबकर सैकड़ों योजन नीचे धँस गई ॥39॥ | mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रिये! इस प्रकार जब प्राणियों की संख्या बहुत बढ़ गई और स्थिति अत्यन्त भयंकर हो गई, तब पृथ्वी उस अत्यन्त भारी भार से दबकर सैकड़ों योजन नीचे धँस गई ॥39॥
O dear! In this manner, when the number of living beings increased and the situation became very terrible, then the earth, being pressed down by the immense weight, sank down by hundreds of yojanas. ॥39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥