Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.142.38: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पुरुषोत्तम! जैसे वर्षा ऋतु में जल बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य भी सहस्र-दस-सहस्र गुना बढ़ने लगे॥38॥ | mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा पुरुषशार्दूल मानुषाश्च परंतप।
सहस्रशो ह्ययुतशो वर्धन्ते सलिलं यथा॥ ३८॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पुरुषोत्तम! जैसे वर्षा ऋतु में जल बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य भी सहस्र-दस-सहस्र गुना बढ़ने लगे॥38॥
O best of men who torment the enemies! Just as the water rises during the rainy season, similarly the human beings also started increasing in number by thousand and ten thousand times. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥