श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.142.35 
पुरा कृतयुगे तात वर्तमाने भयंकरे।
यमत्वं कारयामास आदिदेव: पुरातन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
पिताजी! यह इस कल्प के प्रथम सत्ययुग की बात है, जब बड़ी भयंकर स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उस समय आदिदेव भगवान श्रीहरि यमराज का भी कार्य पूर्ण करते थे। 35.
 
Father! This is about the first Satya Yuga of this Kalpa, when a very terrible situation had arisen. At that time, the ancient God, Lord Shri Hari, used to complete the work of Yamraj also. 35.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas