श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.142.34 
लोमश उवाच
यत् तेऽहं परिपृष्टोऽस्मि कथामेतां युधिष्ठिर।
तत् सर्वमखिलेनेह श्रूयतां मम भाषत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
लोमश बोले - युधिष्ठिर! तुमने मुझसे जो कथा पूछी है, वह मैं तुम्हें सुनाता हूँ। सुनो।
 
Lomasha said - Yudhishthir! I am telling you the whole story about which you have asked me. Listen.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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