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श्लोक 3.142.33  |
केन तद् वीर्यसर्वस्वं दर्शितं परमात्मन:।
एतत् सर्वं यथातत्त्वमिच्छामि द्विजसत्तम।
श्रोतुं विस्तरश: सर्वं त्वं हि तस्य प्रतिश्रय:॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान् के उस अद्भुत पराक्रम का ज्ञान मुझे किसने बताया (दिया) ? हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं यह सब यथार्थ रूप में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। आप ही इस कथा के स्रोत (ज्ञाता) हैं॥33॥ |
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| Who showed (gave) me the knowledge of that wonderful feat of God? O best of Brahmins! I want to hear all this in detail in its true form. You are the source (knower) of this story.॥ 33॥ |
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