श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  3.142.30-31 
युधिष्ठिर उवाच
भगवन् विस्तरेणेमां कथां कथय तत्त्वत:।
कथं तेन सुरेशेन नष्टा वसुमती तदा॥ ३०॥
योजनानां शतं ब्रह्मन् पुनरुद्धरिता तदा।
केन चैव प्रकारेण जगतो धरणी ध्रुवा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा— हे भगवन्! भगवान विष्णु ने पाताल लोक में सैकड़ों योजन नीचे डूबी हुई इस पृथ्वी को किस प्रकार पुनर्जीवित किया? कृपया इस कथा को विस्तारपूर्वक तथा यथार्थ रूप से बताएँ। संसार का भार वहन करने वाली इस अचल पृथ्वी को बचाने के लिए उन्होंने कौन-सा उपाय अपनाया?॥30-31॥
 
Yudhishthira asked— O Lord! How did the lord Vishnu revive this earth which was submerged hundreds of yojanas below the netherworld? Please tell this story in detail and in a true manner. What method did he adopt to save this immovable earth which bears the weight of the world?॥30-31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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