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mahabharat 3.142.26: देवेन्द्र! यद्यपि वह पहले ही तपस्या द्वारा सिद्धि प्राप्त कर चुका है, फिर भी आपके प्रेमवश मैं उस राक्षस को अवश्य मार डालूँगा। कृपया थोड़ी देर और प्रतीक्षा करें॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.142.26 
सोऽहमेनं तव प्रीत्या तप:सिद्धमपि ध्रुवम्।
वियुनज्मि देहाद् देवेन्द्र मुहूर्तं प्रतिपालय॥ २६॥
 
 
अनुवाद
देवेन्द्र! यद्यपि वह पहले ही तपस्या द्वारा सिद्धि प्राप्त कर चुका है, फिर भी आपके प्रेमवश मैं उस राक्षस को अवश्य मार डालूँगा। कृपया थोड़ी देर और प्रतीक्षा करें॥ 26॥
 
Devendra! Though he has already attained siddhi through tapasya, still out of love for you I shall certainly kill that demon. Please wait a little longer.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)