श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.142.25 
विष्णुरुवाच
जानामि ते भयं शक्र दैत्येन्द्रान्नरकात् तत:।
ऐन्द्रं प्रार्थयते स्थानं तप:सिद्धेन कर्मणा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान विष्णु ने कहा- इन्द्र! मैं जानता हूँ, तुम दैत्यराज नरकासुर से भयभीत हो। वह अपने तप से इन्द्र का पद छीनना चाहता है॥ 25॥
 
Then Lord Vishnu said- Indra! I know, you are afraid of the demon king Narakasur. He wants to take the position of Indra by his ascetic deeds.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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