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mahabharat 3.142.21: 'तब उन्होंने मन में अविनाशी भगवान विष्णु का ध्यान किया। उनका स्मरण करते ही सर्वव्यापी भगवान श्रीपति वहाँ प्रकट हो गये।   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.142.21 
तेन संचिन्तितो देवो मनसा विष्णुरव्यय:।
सर्वत्रग: प्रभु: श्रीमानागतश्च स्थितो बभौ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'तब उन्होंने मन में अविनाशी भगवान विष्णु का ध्यान किया। उनका स्मरण करते ही सर्वव्यापी भगवान श्रीपति वहाँ प्रकट हो गये।
 
'Then he contemplated upon the indestructible Lord Vishnu in his mind. As soon as he remembered Him, the omnipresent Lord Shripati appeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)