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mahabharat 3.142.19: ‘अपनी महान आध्यात्मिक शक्तियों और तीव्र शारीरिक बल के कारण वह देवताओं के लिए सदैव अजेय रहता था और स्वयं ही समस्त देवताओं को पीड़ा देता था।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.142.19 
तपोबलेन महता बाहुवेगबलेन च।
नित्यमेव दुराधर्षो धर्षयन् स दिते: सुत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘अपनी महान आध्यात्मिक शक्तियों और तीव्र शारीरिक बल के कारण वह देवताओं के लिए सदैव अजेय रहता था और स्वयं ही समस्त देवताओं को पीड़ा देता था।॥19॥
 
‘Due to his great spiritual powers and his rapid physical strength, he always remained invincible for the gods and himself used to torment all the gods.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)