श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.142.17 
पुरातनेन देवेन विष्णुना परमात्मना।
दैत्यो विनिहतस्तेन सुरराजहितैषिणा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'प्राचीन भगवान श्री विष्णुदेव ने देवराज इन्द्र का हित करने की इच्छा से उस दैत्य का वध किया था ॥17॥
 
'The ancient God Shri Vishnudev had killed that demon with the desire of doing good to Devraj Indra. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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