श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.142.14 
तान् प्रष्टुकामान् विज्ञाय पाण्डवान् स तु लोमश:।
उवाच वाक्यं वाक्यज्ञ: शृणुध्वं पाण्डुनन्दना:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी ने समझ लिया कि पाण्डव उस श्वेत पर्वत के समान वस्तु के विषय में कुछ पूछना चाहते हैं। तब उपदेश कला जानने वाले उन महामुनि ने कहा - 'पाण्डवों! सुनो॥14॥
 
Lomasha understood that the Pandavas wanted to ask something about that white mountain-like object. Then that great sage, who knew the art of preaching, said, 'Pandavas! Listen.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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