श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.142.11 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा लोमशस्य महात्मन:।
आकाशगङ्गां प्रयता: पाण्डवास्तेऽभ्यवादयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महात्मा लोमश के ये वचन सुनकर सभी पाण्डवों ने शांत मन से देवी आकाशगंगा (अलकनंदा) को प्रणाम किया॥11॥
 
Hearing these words of Mahatma Lomash, all the Pandavas bowed to Goddess Akashganga (Alaknanda) with a balanced mind. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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