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mahabharat 3.142.10: तुम सब लोग अपने मन को वश में रखते हुए इस भव्य, दिव्य नदी के तट पर जाओ और इसे सादर प्रणाम करो॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 142: पाण्डवोंद्वारा गंगाजीकी वन्दना, लोमशजीका नरकासुरके वध और भगवान् वाराहद्वारा वसुधाके उद्धारकी कथा कहना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.142.10 
एतां भगवतीं देवीं भवन्त: सर्व एव हि।
प्रयतेनात्मना तात प्रतिगम्याभिवादत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग अपने मन को वश में रखते हुए इस भव्य, दिव्य नदी के तट पर जाओ और इसे सादर प्रणाम करो॥10॥
 
Keeping your minds under control, all of you should go to the banks of this majestic, divine river and offer your respectful obeisance to it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)