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mahabharat 3.141.9: हे कुरुश्रेष्ठ भीमसेन! मैं अत्यन्त दुःखी हूँ, क्योंकि मैं अस्त्रविद्या में निपुण, युद्धकला में कुशल और अद्वितीय धनुर्धर अर्जुन को नहीं देख रहा हूँ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.141.9 
कृतास्त्रं निपुणं युद्धेऽप्रतिमानं धनुष्मताम्।
न पश्यामि कुरुश्रेष्ठ तेन तप्ये वृकोदर॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ भीमसेन! मैं अत्यन्त दुःखी हूँ, क्योंकि मैं अस्त्रविद्या में निपुण, युद्धकला में कुशल और अद्वितीय धनुर्धर अर्जुन को नहीं देख रहा हूँ॥9॥
 
O best of the Kurus, Bhimasena! I am very sad because I do not see Arjuna, who is proficient in the knowledge of weapons, skilled in warfare and an unmatched archer.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)