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mahabharat 3.141.8: वृकोदर! मैं उस श्यामवर्ण, बलवान, सिंह के समान चाल वाले, निद्रा को जीतने वाले तथा महाबाहु अर्जुन को नहीं देख पा रहा हूँ। इसलिए मैं अत्यन्त व्याकुल हूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.141.8 
तं वै श्यामं गुडाकेशं सिंहविक्रान्तगामिनम्।
न पश्यामि महाबाहुं तेन तप्ये वृकोदर॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वृकोदर! मैं उस श्यामवर्ण, बलवान, सिंह के समान चाल वाले, निद्रा को जीतने वाले तथा महाबाहु अर्जुन को नहीं देख पा रहा हूँ। इसलिए मैं अत्यन्त व्याकुल हूँ।
 
Vrikodara! I am not able to see the dark-skinned, powerful Arjuna, who walks with the gait of a lion, who has conquered sleep, and who is mighty-armed. Therefore, I am very distressed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)