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mahabharat 3.141.6: मैं अर्जुन के दर्शन की इच्छा से ही तुम्हारे साथ विभिन्न तीर्थस्थानों, सुन्दर वनों तथा मनोहर सरोवरों के तटों की यात्रा कर रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.141.6 
तीर्थानि चैव रम्याणि वनानि च सरांसि च।
चरामि सह युष्माभिस्तस्य दर्शनकाङ्क्षया॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं अर्जुन के दर्शन की इच्छा से ही तुम्हारे साथ विभिन्न तीर्थस्थानों, सुन्दर वनों तथा मनोहर सरोवरों के तटों की यात्रा कर रहा हूँ।
 
With the sole desire to see Arjuna I am traveling with you to various places of pilgrimage, beautiful forests and on the banks of lovely lakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)