Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.141.4: मैं अपने भाइयों के साथ उनके दर्शन की प्यास से इस वन में आया हूँ। हे वीर भीमसेन! जिस घटना में दु:शासन ने द्रौपदी के केश पकड़े थे, उसका स्मरण मुझे और भी अधिक दुःख दे रहा है।   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.141.4 
तस्य दर्शनतृष्णं मां सानुजं वनमास्थितम्।
याज्ञसेन्या: परामर्श: स च वीर दहत्युत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने भाइयों के साथ उनके दर्शन की प्यास से इस वन में आया हूँ। हे वीर भीमसेन! जिस घटना में दु:शासन ने द्रौपदी के केश पकड़े थे, उसका स्मरण मुझे और भी अधिक दुःख दे रहा है।
 
I have come to this forest with my brothers with a thirst to see him. O brave Bhimasena! The memory of the incident in which Dushasan had grabbed Draupadi's hair burns me with even more grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)