Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.141.27: भीमसेन! जो मनुष्य अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं करता, वहाँ जाने पर उसे मक्खी, मच्छर, सिंह, व्याघ्र और सर्पों का सामना करना पड़ता है, किन्तु संयमपूर्वक रहने वाला मनुष्य उन पशुओं को देखता भी नहीं। | mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन! जो मनुष्य अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं करता, वहाँ जाने पर उसे मक्खी, मच्छर, सिंह, व्याघ्र और सर्पों का सामना करना पड़ता है, किन्तु संयमपूर्वक रहने वाला मनुष्य उन पशुओं को देखता भी नहीं।
Bhimsena! A person who does not control his mind and senses, on going there has to face flies, flies, mosquitoes, lions, tigers and snakes, but a person who lives with self-control does not even see those animals. 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥