Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.141.25: भरतनन्दन! वृकोदर! उस क्षेत्र में किसी भी वाहन से नहीं जाया जा सकता और जो क्रूर, लोभी और अशान्त है, उसका श्रद्धा के अभाव में उस स्थान पर जाना असम्भव है। ॥25॥ | mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च यानवता शक्यो गन्तुं देशो वृकोदर।
न नृशंसेन लुब्धेन नाप्रशान्तेन भारत॥ २५॥
अनुवाद
भरतनन्दन! वृकोदर! उस क्षेत्र में किसी भी वाहन से नहीं जाया जा सकता और जो क्रूर, लोभी और अशान्त है, उसका श्रद्धा के अभाव में उस स्थान पर जाना असम्भव है। ॥25॥
Bharatanandan! Vrikodara! One cannot go to that region by any vehicle and it is impossible for a person who is cruel, greedy and restless, to go to that place due to lack of faith. ॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥