Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.141.23-24: गंधमादन वह स्थान है जहाँ विशाल बदरी वृक्ष और भगवान नारायण का आश्रम स्थित है। उस उत्तम पर्वत पर यक्ष सदैव निवास करते हैं; हम लोग वहाँ जाएँगे। इसके अतिरिक्त वहाँ दैत्यों द्वारा सेवित कुबेर की सुन्दर पुष्करिणी भी है, जहाँ हम लोग घोर तपस्या करते हुए पैदल चलेंगे॥23-24॥ | mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंधमादन वह स्थान है जहाँ विशाल बदरी वृक्ष और भगवान नारायण का आश्रम स्थित है। उस उत्तम पर्वत पर यक्ष सदैव निवास करते हैं; हम लोग वहाँ जाएँगे। इसके अतिरिक्त वहाँ दैत्यों द्वारा सेवित कुबेर की सुन्दर पुष्करिणी भी है, जहाँ हम लोग घोर तपस्या करते हुए पैदल चलेंगे॥23-24॥
Gandhamadan is the place where the huge Badari tree and the hermitage of Lord Narayana are located. The Yakshas always reside on that excellent mountain; we will visit it. Besides this, there is also the beautiful Pushkarini of Kubera served by the demons, where we will walk on foot while performing severe penance.॥23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥